अरुणाचल प्रदेश का लोकसाहित्य: वीरेंद्र परमार

अरुणाचल प्रदेश का लोकसाहित्य                                - वीरेंद्र परमार          अरुणाचल प्रदेश अपने नैसर्गिक सौंदर्य , सदाबहार घाटियों , वनाच्‍छादित पर्वतों , बहुरंगी संस्‍कृति , समृद्ध विरासत , बहुजातीय समाज , भाषायी वैविध्‍य एवं नयनाभिराम वन्‍य - प्राणियों के कारण देश में विशिष्‍ट स्‍थान रखता है । अनेक नदियों एवं झरनों से अभिसिंचित अरुणाचल की सुरम्‍य  भूमि में भगवान भाष्‍कर सर्वप्रथम अपनी रश्‍मि विकीर्ण करते हैं , इसलिए इसे उगते हुए सूर्य  की भूमि का अभिधान दिया गया है । इसके पश्चिम में भूटान और तिब्बत , उत्तर तथा उत्तर – पूर्व में चीन , पूर्व एवं दक्षिण – पूर्व में म्यांमार और दक्षिण में असम की ब्रह्मपुत्र घाटी स्थित है I पहले यह उत्तर – पूर्व सीमांत एजेंसी अर्थात नेफा के नाम से जाना जाता था I 21 जनवरी 1972 को इसे केन्द्रशासित प्रदेश बनाया गया I इसके बाद 20 फ़रवरी 1987 ...