अप्रैल 16, 2011
एक मुद्दत हो गई तुम,हे ठीक से देखे हुए कभी को कमबख्त चाँद पूरा निकलेगा हर टहनी को तोड़ डाला ना जाने तुम्हारा चेहरा कहा छुपा होगा..अब तो वक़्त...
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अप्रैल 15, 2011
युवा सम्बन्ध और संचार संबंधो की परिभाषा समय के साथ साथ परिवर्तित होती रहती है आँख मिलाने से नेट पर चाटिंग करने तक की रोचक गाथा जितने ही गह...
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अप्रैल 11, 2011
एक अपने हाथो बंद करो कोई समय है जो वहा से गुजरना चाहता है दो आसमा बहुत ऊँचा है कुछ दूर खड़ा मैं छु लेना चाहता हु परछाई को तीन आम के झुरमुट स...
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अप्रैल 11, 2011
खेत वो दूर दूर तक फ़ले खेत एक दुसरे से गले मिलते पिली चादर ओढ़े रिश्तो का एक मेला सा धुप की पहली आहात वो उतरती आसमा से ज़मी पर सोते हुए भँ...
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अप्रैल 11, 2011
चेहरे तरह तरह के लोग बेठे सफ़र कर रहे बस मैं कोई काम से लोटता थका हरा कोई घर पहुचने किजल्दी मैं बार बार घडी को निहारता एक से एक चेहरे है ब...
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अप्रैल 11, 2011
ज़िन्दगी उतनी आसान नहीं जितना हम मान लेते है.. ज़िन्दगी उससे कही ज्यादा कठिन और रहस्यों से भरी है.. कभी टूटे पत्तो मैं ज़िन्दगी होती है तो क...
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अप्रैल 11, 2011
कभी तो एक रात मेने उनके हाथो से समय को युही सरकते हुए देखा हर रात वो युही हाँथ खुला छोड़ देते थे .. उनके घर के सामने एक वृक्ष था बड़ा सा ......
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अप्रैल 11, 2011
अँधेरा अँधेरे की आहात मैं हर पल सोता है तो कभी रोशन ...
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अप्रैल 11, 2011
इमारते कुछ शांत कड़ी कुछ अपने अवशेषों से लड़ती कुछ कहना चाहती है हमसे यह इमारते क्यों नहीं आज कोई बात करता इनसे ...
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अप्रैल 11, 2011
मेरे बाद भी ... सारे के सारे बेगाने हुए किसी दरिया के दो किनारे हुए मिल जाये मोती साहिल पे उसे रख देना मेरी पलकों पे टूट के बिखर जायेंगे , ...
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अप्रैल 11, 2011
अजीब है यह ज़िन्दगी भी कभी ख़ुशी भी हो तो न जाने किस गम का इंतज़ार करती है सब कुछ मिल जाये फिर भी इज़हार करती है पल पल मैं रुख बदलती है ज़िन्द...
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अप्रैल 11, 2011
मेरे एहसासों को उस तरह मत बिखरना जेसे हवा बिखेर देती है ओस की बूंदों को पत्तो से मुझे मत तडपना उस तरह जेसे तड़पता है बालक प्यार की एक छुअन क...
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अप्रैल 11, 2011
जागृति एक हल आज फिर लोकतंत्र की जित हुई आज एक बार फिर मनुष्य की अकक्न्षा की जित हुई परन्तु किस सत्य से हम भाग रहे है समस्याए उत्पन होती ही क...
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अप्रैल 07, 2011
तुम्हारा आना एक नए एहसास एक नै उमंग की तरह है । जो मेरी कविताओ मैं नयेपन के रूप मैं दिखेगा ।
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अप्रैल 07, 2011
जीवन के सत्य को दो अक्षर मैं समेटना अत्यंत ही कठिन है पर नामुनकिन नहीं...
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