जनवरी 28, 2013
       पूर्वाञ्चल भारत में वैष्णव भक्तिकालीन कलारूपों की सामाजिक भूमिका       भारत के  पूर्वोत्तर हिमालयी क्षेत्र तथा उसके निचले मैदान...
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नुक्कड़ नाटक : बस और नहीं

अगस्त 02, 2012
नुक्कड़ नाटक : बस और नहीं  कुछ लोग दर्शक की तरफ इस प्रकार खड़े है की वो एक दुसरे के आगे न आये ..मध्य में एक व्यक्ति दोनों हाथ और पैर को ...
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नाटक :आत्महत्या

जनवरी 07, 2012
नाटक :आत्महत्या (भीतर से प्रकाश उभरता हुआ ..एक व्यक्ति दर्शकों की तरफ चुपचाप देख रहा है ..कुछ देर शांत रहता है ..और फिर दर्शक मैं से कु...
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जनवरी 07, 2012
मत टकरा मुझसे इस कदर मन की मैं शीशा  नहीं पर दरार तो जरुर पड़ेगी तेरे न होने का गम काफी नहीं की तू बह निकली मेरी आँखों से केसे हो जाऊ ...
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जनवरी 07, 2012
एक सोच उतर आई उन भीगी आँखों मैं एक शक्ति समां गई उन बंधे हाथों में आज पत्तों ने खूब कही अपने अलगाव की दास्तान फिर कोई अप्सरा उतरी जम...
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inki aankhon main

दिसंबर 31, 2011
इन आँखों से पूछो की नया साल क्या है इसने पूछो  की इनके हाथो मैं क्या है सपने जो इनके पलकों पर जम गए है हर बरसात मैं बुँदे वो भी बह...
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खंडहर

दिसंबर 30, 2011
खंडहर  जो तेरा है सच उसे बाहर  निकाल मुक्त कर उस पिंजरे से होने दे युद्ध सब्द और अर्थ में मत सोच की कोण सा प्रलय आयेगा कुछ खंडहर ...
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दिसंबर 26, 2011
उस रात तेरी वो बात मुझे याद है जब तुने रच डाली थी मुझ पर कविता प्रकृति के समस्त उपादानों के साथ कर दिया था मुझे सम्मिलित जिस दिन तुने क...
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"द्वन्द"

दिसंबर 25, 2011
"द्वन्द" जब भी तुझमे खोजता हूँ अपने भीतर के प्रश्नों को तो तेरा  मुझमे होना एक द्वन्द सा लगता है तनाव की रेखा बन जाती है तेर...
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"रात "

दिसंबर 25, 2011
"रात " इस रात वो बात फिर से न हो की फिर कहीं कोई सुबह ठहर जाए इस रात वो आइना न देखा हो किसी ने की फिर किसी का चेहरा उसमे यूँ ...
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"वो "

दिसंबर 25, 2011
"वो " उसकी चुनरी से वो धुप छनकर मुझ पर पड़ती थी उसने अपने सपनों को काटकर मेरे सपनों को बुना उसका स्नेह इस दुनिया के सागरों से...
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दिसंबर 25, 2011
हर बार जो चाहत तुम्हारी मेरे लिए और भी करीब होने का एहसास दिलाती थी एक पल के लिए तुम रूकती तो उससे आगे छह बन जाती कुछ ख्वाबो का खेल है ...
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दिसंबर 25, 2011
एक दख्त सेहर मैं पड़ा था एक तुझ पर पड़ा मेरा एक ख़ामोशी सेहर मैं पसरी थी एक ख़ामोशी मुझमे पसरी थी एक नाव नदी मैं फसी थी एक नाव मेरे भीतर...
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वो तुम्हारा चेहरा

दिसंबर 25, 2011
वो तुम्हारा चेहरा जो पिछली बार छुट गया था मुलाकात में कुछ सपने जो कल देखे थे टूट चुके थे आधी रात में वो तुम्हारा मुस्कराना शरमा के पल...
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दिसंबर 25, 2011
सीर पर उसके बोझ की गठरी हाथ उसके हवा मैं लहरते योवन की देहलीज पर उसकी कमर नव दुल्हन से उसके पाँव मुस्कान ठहरती उसके चेहरे पर ज्यों सावन...
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दिसंबर 25, 2011
एक खुबसूरत शाम फेलाहे खडी है बाँहें तारो की चाय समेटने को और कहने को हाँ सच मैं यह ज़िन्दगी की खुबसूरत शाम है २. उस रेट के आखिरी कण ...
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दिसंबर 25, 2011
"केनवास " आज केनवास पर एक चित्र उभर आया माथे पर प्रहार का निशाँ आँखों मैं जमा हुआ दर्द तन पर लाचारी और बेबसी के मंत्र हृदय...
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" हाशिया "

दिसंबर 25, 2011
" हाशिया "   सड़कों पर फेकी वो लाशें किसकी है ? माथे पर उनके अभी भी खिचाव है खोफ का भयानक चेहरा  अभी भी उनकी आँखों से गया नहीं    उ...
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kuch kahi kuch unkahi...

अक्टूबर 19, 2011
कुछ कही कुछ अनकही सी बात रह जाती है  जब अपने होठो मैं बंद  कर लेता हु अपने अल्फाजो को  एक पल के लिए दिल से दिमाग  तक  पहुच जाते है विचार मेर...
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